राजनीति

आयकर छापे से अफसरों में बढ़ी छटपटाहट

आयकर की टीम द्वारा पिछले 2 दिन से भोपाल और इंदौर में चल रही छापे की कार्रवाई से राजनीतिज्ञों में ही नहीं, बल्कि अफसरों में भी छटपटाहट बढ़ गई है। मंत्रालय में दिन भर केवल छापे की कार्रवाई की टोह लेने में अधिकारी व्यस्त रहे। दरअसल जब 15 वर्षों के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार लौटी तब तक अधिकांश कांग्रेसी नेताओं के संबंध अधिकारियों से वैसे नहीं रहे जैसे पहले थे। इन 15 वर्षों में कांग्रेस शासन काल के जहां पुलिस अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए वहीं कुछ अधिकारी पाला बदलकर भगवाधारी हो गए। सरकार बनने के बाद नई प्रशासनिक जमावट के लिए जहां से भी जैसे अपने लोगों के द्वारा अधिकारियों के नाम सुझाए गए पदस्थापना पाते गए लेकिन बीच में किस-किसने कैसा-कैसा खेल कर लिया उसका पता लगा पाना संभव नहीं था।
हालांकि स्थानांतरण का दौर चला तब इस चर्चा आम हो गई कि ले देकर स्थानांतरण हो रहा है। खासकर विपक्षी दल भाजपा के नेता तो बाकायदा तबादला उद्योग की उपाधि भी देने लगे और जब प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ ओएसडी और सलाहकार के के साथ साथ इनसे जुड़े लोगो अश्वनी शर्मा के यहां छापे पड़े और जिस में लगभग 100000000 नकद और सोने-चांदी के जेवरात, संपत्तियों के दस्तावेज मिले तो फिर एक बार फिर भाजपा के नेताओं ने इस राशि का संबंध तबादलों से जोड़ दिया जिससे सरकार की बदनामी हो जाए। हालांकि पूरा मामला पूरी जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा आखिर इतनी ज्यादा नकद राशि घर पर क्यों मिली। बहरहाल भोपाल और इंदौर छापेमारी से प्रदेश के अफसरों में छटपटाहट देखी जा रही है। कुछ अफसर तो पल पल की खबर रख रहे हैं।
उन्हें यह चिंता है कि राशि के साथ-साथ छापे में कोई ऐसा दस्तावेज ना मिल जाए जिसमें लेन-देन का उल्लेख हो क्योंकि माना यही जा रहा है कि इस समय इतनी अधिक राशि मिलना हाल ही में हुए स्थानांतरण के लेनदेन की हो सकती है। राजधानी के मंत्रालय के नई पुरानी बिल्डिंग में सभी फ्लोर पर अधिकारी और कर्मचारी दिन भर छापेमारी पर ही माथापच्ची करते रहे जबकि मंत्रालय के बाहर पूरे प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के नेता एक-दूसरे पर आरोप मड़ते रहे। हालांकि छोटी-मोटी घटनाओं पर बयान देने वाले भाजपा नेता शाम तक ही इस पर कुछ कह सके जबकि कांग्रेस के नेता दोपहर से ही भाजपा बदले की कार्रवाई बताने में जुट गए थे।
प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान अन्य मुद्दों के साथ साथ अब छापेमारी की कार्रवाई में एक नए मुद्दे के रूप में नेताओं के जुबान पर होगा। माना जा रहा है कि जितने भी अधिकारियों और कर्मचारियों ने ले देकर स्थानांतरण कर आए हैं वे तो दहशत में है ही, साथ ही वे लोग भी घबराए हुए हैं जिनके कॉल डिटेल खंगाले जाने के बाद नाम सामने आ सकते हैं या छापेमारी के दौरान ऐसी कोई डायरी या दस्तावेज आयकर विभाग की टीम के हाथ लग गए हो जिसमें उनके नाम और ब्यौरा हो।
संभावना यह भी जताई जा रही है कि अब प्रदेश सरकार भी बदले की कार्रवाई कर सकती है और भाजपा शासन काल के जिन घोटालों की वह चर्चा चुनाव के दौरान कर ती रही है उनकी जांच तेजी से करा सकती है जिससे उन पर भी चुनाव के दौरान आरोप लगाने में कांग्रेस पार्टी को सुविधा हो सके। कुल मिलाकर छापे की कार्रवाई से राजनीतिक जंग संघर्ष में बदल सकती है और ना केवल आरोप-प्रत्यारोप के दौर चलेंगे वरन एक-दूसरे की पोल खोलने में अब कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। केंद्र और राज्य के संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।

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