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इंटरनेट की लत से बचें युवा, ज्यादा इस्तेमाल हानिकारक: उप राष्ट्रपति – Rashtriya Pyara
दिल्ली

इंटरनेट की लत से बचें युवा, ज्यादा इस्तेमाल हानिकारक: उप राष्ट्रपति

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नई दिल्ली। लगातार इंटरनेट का संपर्क बच्चों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। युवाओं को इंटरनेट की लत से बचना चाहिए। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडु ने बच्चों को प्रौद्योगिकी और इंटरनेट के नुकसान से बचाने के लिए माता-पिता और शिक्षकों का आह्वान किया है। वह रविवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के पन्नालाल गिरधरलाल दयानंद एंग्लो-वैदिक (पीजीडीएवी) सांध्य महाविद्यालय के हीरक जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उप राष्ट्रपति ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम देश में उच्च शिक्षा को लेकर गंभीरतापूर्वक पुनर्विचार करें। इसमें भारतीय मूल्यों, हिन्दुस्तानी संस्कृति, देशीय वातावरण एवं प्राचीन ज्ञान को समाहित करें। इसके लिए जरूरी है कि विश्वविद्यालीय परिसर में केवल शैक्षणिक गतिविधियां ही हों। उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपने विश्वविद्यालीय परिसरों को सिर्फ और सिर्फ ज्ञान प्राप्ति के केंद्र के रूप में ही बनाए रखना होगा। इसके लिए वह सूचना तकनीकी के उपयोग के समर्थक हैं लेकिन साथ ही हमें ये ध्यान रखना होगा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया जैसे साधनों का सकारात्मक एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए उपयोग हो।
उन्होंने कहा कि हमारे युवा इसके लती होकर अपनी ऊर्जा व्यर्थ न करें। इस मौके पर कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल टी.एन. चतुर्वेदी और डीयू के कुलपति प्रो योगेश त्यागी भी मौजूद थे। पीजीडीएवी कॉलेज की स्थापना 1958 में हुई थी। वेंकैया नायडु ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों और अन्य नेताओं द्वारा बलिदान, वीरता और योगदान की कहानियों को हमारी शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक बनाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय परिसरों में ऐसे आयोजन नहीं होने चाहिए जो शिक्षा से जुड़े न हों। छात्रों को अनुशासन और जरूरतमंदों की सेवा करने के लिए सहानुभूति की भावना जागृत करने के लिए स्काउट्स और गाइड्स या एनसीसी जैसे संगठनों में हिस्सेदारी को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। शिक्षा को व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सीखने और ज्ञान प्राप्त करने के अलावा, छात्रों को योग का अभ्यास करना और खेल गतिविधियों में भाग लेना भी सीखना चाहिए क्योंकि आज की तनाव भरी दुनिया में संतुलन की भावना विकसित करना आवश्यक हो गया है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों को आध्यात्मिक मूल्यों के साथ ही छात्रों को संस्कारित करने का आह्वान किया।

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