धर्म-संसार

उत्पन्ना एकादशी आज, जानें पूजा विधि और इसका महत्व

मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्‍पन्ना एकादशी के नाम से जानते हैं। आज (3 दिसंबर, सोमवार) उत्पन्ना एकादशी मनाई जा रही है। कृष्ण पक्ष में होने के कारण इसे कृष्ण एकादशी भी कहते हैं। हिन्दु धर्म को मानने वाले लोग अन्य एकादशियों की तरह उत्‍पन्ना एकादशी को भी व्रत करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा उपासना करते हैं। साल में कुल 26 एकादशियों होती हैं जिनमें से उत्‍पन्ना एकादशी का अपना अलग ही महत्व है।
माना जाता है कि इस दिन ही भगवान विष्णु ने देवी एकादशी के रूप में उत्पन्न हुए और मुर नामके राक्षस का वध किया था। इसी के कारण इसे उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी देवोत्थान या देवउठनी एकादशी के ठीक बाद आती है।
उत्पन्ना एकादशी का महत्व –
मान्यता है कि जिसे वर्ष की सभी एकादशियों का व्रत शुरू करना है उसे उत्पन्ना एकादशी से ही व्रत करना शुरू करना चाहिए। एकादशी का व्रत काफी कठोर माना जाता है कि क्योंकि व्रत के दौरान 24 घंटे तक कुछ भी खाया पिया नहीं जाता। कहा जाता है कि उत्पन्ना एकादशी का व्रत करने से अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर पुण्य मिलता है।
एकादशी व्रत व पूजा विधि-
दशमी को सात्विक भोजन करें और एकादशी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नानआदि करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा उपासना, मंत्र जाप आदि करना चाहिए। व्रत के दौरान पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण करते रहना चाहिए। एकादशी के दिन सूर्योदय और सूर्यास्त के वक्त दिन में दो बार भगवान विष्णु की आरती करें। प्रात पूजा के समय धूप-दीप से भगवान विष्णु की पूजा करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में आस्था रखने वाले लोग एकादशी के दिन चावल के सेवन से परहेज करते हैं।
एकादशी तिथि प्रारंभ – दोपहर दो बजे से (2 दिसंबर)
एकादशी तिथि समाप्त – दोपहर 12 बजकर 59 मिनट (3 दिसंबर

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