उत्तर प्रदेश

कवाल कांड : सभी सात गुनहगारों को उम्रकैद और दो-दो लाख का जुर्माना

मुजफ्फरनगर। कवाल में करीब साढ़े पांच साल पहले 12वीं कक्षा के छात्र गौरव और उसके ममेरे भाई सचिन की हत्या करने वाले सात गुनहगारों को सप्तम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हिमांशु भटनागर ने शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हर दोषी पर 2.12 लाख रुपये अर्थदंड लगाया गया है। इस राशि का 80 प्रतिशत सचिन और गौरव के परिजनों को देने के आदेश अदालत ने दिए हैं। छह अभियुक्तों को मुजफ्फरनगर और एक को वापस बुलंदशहर जेल भेज दिया गया।
सभी सातों अभियुक्त दो दिन पहले दोषी ठहराए गए थे। शुक्रवार को अभियुक्तों के पक्ष से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर अली ने कोर्ट से कहा कि सजा के प्रश्न पर केवल अभियुक्त पक्ष को ही सुना जा सकता है। उन्होंने अभियुक्त पक्ष के एक युवक की हत्या का हवाला देते हुए इस कांड को दो पक्षों का झगड़ा करार दिया और कम से कम सजा दिए जाने की प्रार्थना कोर्ट से की।
जवाब में वादी रविंद्र सिंह की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल जिंदल ने कोर्ट में कवाल कांड के बाद हुए दंगे की तुलना मुबंई बम धमाके करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि सीआरपीसी की 235 (2) में सजा पर दोनों पक्षों को अपनी बात रखने और अपने साक्ष्य देने का अधिकार है। उन्होंने जेल में रहते हुए अभियुक्त मुजम्मिल उर्फ बिल्ला के खिलाफ जेल वार्डन चुन्नी लाल की हत्या में पुलिस विवेचक द्वारा चार्जशीट का देने का उल्लेख करते हुए कहा कि अभियुक्त अत्यंत क्रूर प्रवृत्ति के हैं। कवाल कांड अचानक होने वाला झगड़ा नहीं था, बल्कि गौरव और सचिन की हत्या एक दिन पहले रची गई साजिश का परिणाम थी। इसलिए अभियुक्तों को मृत्युदंड की सजा दी जानी चाहिए।
अभियोजन की ओर से एडीजीसी जितेंद्र कुमार त्यागी और एडीजीसी आशीष त्यागी ने भी मृतकों को आई कई चोटों का हवाला देते हुए कहा कि अभियुक्तों ने क्रूरता की हद पार कर दी थी। इसलिए इसे विरल से विरलतम की श्रेणी में मानते हुए अभियुक्तों को मृत्युदंड दिया जाए। जवाब में अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नासिर अली ने इसका प्रतिवाद करते हुए अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा ही दिए जाने की मांग की।
प्रत्येक दोषी पर 2.12 लाख का अर्थदंड
दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश हिमांशु भटनागर ने अपराह्न करीब सवा तीन बजे अभियुक्त मुजम्ममिल उर्फ बिल्ला, मुजस्सिम, फुरकान, जहांगीर, नदीम, अफजाल, इकबाल को आईपीसी की धारा 302/149 में उम्रकैद और प्रत्येक पर दो लाख रुपये अर्थदंड लगाया। इसके अलावा धारा 147 में दो वर्ष की कैद व दो हजार रुपये अर्थदंड, धारा 148 में तीन साल की कैद और पांच हजार रुपये अर्थदंड तथा 506 में पांच साल की कैद और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अर्थिक दंड की धनराशि से 80 प्रतिशत राशि गौरव और सचिन के परिजनों को देने के आदेश भी दिए हैं।
पांच साल बाद शांत रहा कवाल, कोई हलचल नही दिखाई दी
कचहरी में तैनात रहा भारी पुलिस बल
शुक्रवार को कवाल कांड के अभियुक्तों की सजा पर आने वाले फैसले को लेकर कचहरी परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। दिन में 12 बजे पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश हिमांशु भटनागर ने अभियुक्तों को सजा पर सुनवाई शुरू की।
कवाल गांव में तेज आवाज में गाने बजाने को लेकर दो पक्षों पथराव व फायरिंग
तत्कालीन प्रदेश सरकार के फैसले सवालों के घेरे में
जानसठ क्षेत्र के गांव कवाल में 27 अगस्त 2013 को भीड़ के हमले में हुई गौरव-सचिन की हत्या का मामला प्रदेश की सत्तारूढ़ सपा की सरकार के कुछ फैसले सवालों के घेरे में आज भी हैं। इन्हीं फैसलों को लोग आज भी दंगे का कारण मानते हैं।
12 दिन में 12 फैसले आए सवालों के घेरे में
पहला फैसला
कवाल में गौरव-सचिन की हत्या के बाद बिना स्थिति पर नियंत्रण किए हुए लाश उठने से पहले डीएम सुरेंद्र सिंह, एसएसपी मंजिल सैनी और आईजी मेरठ जोन भावेश कुमार सिंह का तबादला शासन द्वारा करना।
दूसरा फैसला
गौरव सचिन की हत्या के मामले में अभियुक्तों को बचाने के लिए राजनैतिक दबाव में शाहनवाज की हत्या में घटना के करीब दस घंटे बाद गौरव व सचिन के परिजनों को भी शाहनवाज की हत्या में नामजद कर लेना।
तीसरा फैसला
कवाल कांड के अगले दिन 28 अगस्त 2013 को मुजफ्फरनगर जिले को दोपहर बाद तक डीएम व एसएसपी विहीन कर देना, जिससे सचिन गौरव की अंत्येष्टि में गई भीड़ ने कवाल में आगजनी व तोड़फोड़ की।
चौथा फैसला
दो दिन के तनाव के बावजूद 29 अगस्त को कवाल में पर्याप्त फोर्स नहीं लगाना, जिससे भीड़ ने शिवमंदिर पर तोड़फोड़ की ओर दोनों पक्षों में जमकर पथराव से माहौल बिगड़ गया।
पांचवां फैसला
30 अगस्त 2013 को खालापार में आरोपी पक्ष को रैली करने देना और रैली के मंच पर पहुंचकर डीएम व एसएसपी द्वारा 31 अगस्त को नंगला मंदौड़ में गौरव सचिन की शोकसभा को प्रतिबंधित घोषित करना।

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