साक्षात्कार

कुरैशी का गुगली वाला बयान दर्शाता है पाकिस्तान की नीतियां

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने जिस तरह से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब गलियारे के उद्घाटन समारोह में भारतीय मंत्रियों के शामिल होने को ‘करतारपुर गुगली’ बताया वह हमारी आस्था का उपहास तो है ही साथ में इससे पता चलता है कि वर्तमान में वहां किस कदर ऊंचे पदों पर छोटे लोग आसीन हैं। लगता है कि हमारे पड़ोस के शासकों को अपने अलावा न तो किसी और की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना आता है और न ही वे विदेश नीति व कूटनीति का ककहरा जानते हैं। पाकिस्तान आर्थिक मोर्चे के साथ-साथ विश्व समुदाय में विश्वसनीयता के मोर्चे पर भारी संकट से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने कोई साहसिक कदम उठाने की बजाय जिस तरह से सरकारी कारें व भैंसें बेच कर खजाना भरने की कोशिश की लगभग वही हास्यस्पद प्रदर्शन उनकी दृष्टि में सफल ‘करतारपुर गुगली’ नामक विदेश नीति के मोर्चे पर किया है। जगद्गुरु श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के साल भर चलने वाले समारोह को समर्पित भारत-पाक सीमा पर स्थित गुरु जी से जुड़े गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के खुले दर्शन दीदार के लिए बनाए जाने वाले गलियारे का दोनों तरफ से उद्घाटन हुआ। पाकिस्तान में आयोजित समारोह में भारत ने पड़ौसी देश से खराब संबंधों के बावजूद सदाश्यता दिखाते हुए दो वरिष्ठ मंत्रियों श्रीमती हरसिमरत कौर बादल व स. हरदीप सिंह पुरी को वहां मेहमान के रूप में भेजा। समारोह के अगले ही दिन इमरान खान सरकार के सौ दिन पूरे होने को लेकर आयोजित हुए समारोह में श्री कुरैशी ने यह अभद्र टिप्पणी करते हुए कहा कि इमरान खान ने करतारपुर कोरीडोर की गुगली फेंक कर अपने उस पड़ोसी को दो मंत्री भेजने पर मजबूर कर दिया जो किसी भी तरह संबंध स्थापित करने में आनाकानी करता रहा है।
जैसा कि पहले बताया जा चुका है कि पाकिस्तान आर्थिक व वैश्विक विश्वसनीयता के मोर्चों पर बुरी तरह से घिरा हुआ है। नए पाकिस्तान का वायदा कर सत्ता में आए इमरान खान बेबस नजर आने लगे हैं। देश की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि कर्ज का ब्याज उतारने के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा है। अतीत में उनका आंखें मूंद कर वित्तपोषण करते आरहे अमेरिका ने हाथ खींच लिए और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक पुराने कर्जे का हिसाब मांग रहे हैं। तीनों दानदाताओं या कर्जदाताओं को आशंका है कि पाकिस्तान नए कर्ज की राशि से चीन के उस कर्ज का भुगतान कर सकता है जो उसने अपनी महत्त्वाकांक्षी योजना वन बैल्ट वन रोड को लेकर दिया है। चीन भी पाकिस्तान को और अधिक ऋण देता दिख नहीं रहा क्योंकि उसके बैंक के पुराने चेक भी बाऊंस हो रहे हैं। ऊपर पाकिस्तानी रूपये की कीमत दिनो दिन गिर रही है जिससे विदेशी ऋण का भार असहनीय होता जा रहा है। वर्तमान में वहां हालात यह हैं कि धन के अभाव में सरकारी कामकाज तक नहीं हो पा रहे। अर्थशास्त्र की समझ, दूरदृष्टि के अभाव में इमरान खान कोई बड़ा कदम उठाने की बजाए सरकारी कारों व भैंसों को बेच कर खजाना भरने की कोशिश कर रहे हैं। यही हाल विदेश नीति का है। आतंकवाद को प्रोत्साहन देने के चलते आज पाकिस्तान की विश्वसनीयता धरातल पर है और कोई देश उसके साथ घनिष्ठ संबंध रखने को तैयार नहीं। पाकिस्तान ने प्रयास किया कि करतारपुर गलियारा खोल कर वह दुनिया को सकारात्मक संदेश दे सकता है परंतु श्री कुरैशी के गुगली वाले ब्यान ने इमरान के इस प्रयास को भी पलीता लगा दिया दिख रहा है। वास्तव में वह जिस गुगली पर भारत के फसने के दावे कर रहा है उसमें खुद घिरता दिख रहा है। इस ब्यान से संकेत मिला है कि पाकिस्तान ने करतारपुर गलियारे के निर्माण का कदम सिख धर्म की आस्था व भावनाओं को ध्यान में रख कर नहीं बल्कि अपनी कूटनीतिक विवशता के चलते उठाया है। पाकिस्तान इस गलियारे के रास्ते चल कर दुनिया में अपनी छवि सुधारने की फिराक में दिख रहा है।
पाकिस्तान का यह असली चेहरा पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की आंखें खोलने वाला भी है जो बार-बार अपनी तुकबंदियों से अपने यार इमरान खान के कसीदे पढ़ते रहे हैं और गोपाल सिंह चावला एंड खालिस्तान खूनखराबा पार्टी के लिए भी, कि किस तरह पाकिस्तान उन्हें भारत के खिलाफ गुगली के रूप में प्रयोग कर रहा है। कौन नहीं जानता कि पाकिस्तान को आजादी के तुरंत बाद 1971 में हुआ बंगलादेश के रूप में विभाजन व शर्मनाक हार हर समय कचौटती है। इसी का बदला लेने के लिए वह कभी कश्मीर तो कभी पंजाब और कभी हमारे देश के अन्य हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को अंदरखाते संचालित करता रहा है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पिछली सदी के अंतिम दशकों में पंजाब में चले आतंकवाद के पीछे पाकिस्तान का ही हाथ था। इस आतंकवाद की आग ने न केवल हमारे देश में 25000 निरपराध लोगों की जान ली बल्कि विकास की दृष्टि से पंजाब को कई दशक पीछे धकेल दिया। वर्तमान परिस्थितियां बताती हैं कि पाकिस्तान खून और खाक का खेल खेलने के लिए फिर तत्पर दिख रहा है और कुछ भटके हुए सिख समाज के लोगों को उसी तरह गुगली की तरह इस्तेमाल करना चाहता है जिस तरह मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ जयचंद का किया था।
हिंदू-सिख अल्पसंख्यकों को लेकर पाकिस्तान का इतिहास शर्मनाक रहा है। पाकिस्तान करतारपुर गुरुद्वारा साहिब की तो बात करता है परंतु हाल ही में वहां से लौटे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (अमृतसर) के अध्यक्ष स. गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने बताया कि पाक में अन्य सिख धर्मस्थलों की हालत अत्यंत दयनीय है। इनके रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा और गुरुद्वारों की जमीनों पर भू-माफिया कब्जे कर रहा है। पाकिस्तान के एकमात्र सिख पुलिस अधिकारी के साथ कुछ महीने पहले ही वहां की आईएसआई ने जो व्यवहार किया वह पूरी दुनिया ने देखा कि किस तरह उन्हें घर से बाहर किया गया और उनके केसों का अपमान हुआ। वहां के उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत में स्वतंत्रता के उपरांत भी सिखों की अच्छी खासी संख्या थी जो व्यापारी थे परंतु सभी जानते हैं कि किस तरह उन्हें वहां से योजनाबद्ध तरीके से उजाड़ा गया। पाकिस्तान द्वारा पाले गए तालिबानियों ने उनसे जजिया वसूला और उनकी संपतियों पर कब्जे किए। परेशान हो कर वहां से सिख व्यापारियों को भारत सहित दुनिया के अन्य हिस्सों में शरण लेनी पड़ी। जगद्गुरु गुरु नानक देव जी के जीवन से जुड़ा गुरुद्वारा करतारपुर साहिब पाकिस्तान व वहां के शासकों के लिए कूटनीतिक गुगली हो सकता है परंतु हमारे लिए अस्था व श्रद्धा का प्रतीक है। पाकिस्तान आतंकवाद के कैंसर से ग्रस्त है और उसे छोटे-मोटे इलाज की नहीं बल्कि क्रीमोथैरेपी की आवश्यकता है।

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