साक्षात्कार

क्या वनडे में पूरी हो गई है भारत के लिए नंबर 4 की खोज ?

क्या इस दौरे से कप्तान कोहली के दिल में सुकून आया है। अगर बात करें इन सभी सवालों के जवाब की तो इसका हल वनडे क्रिकेट में भारत के लिए चौथे स्थान पर खेलने वाले खिलाड़ी की बहस को लेकर खत्म होता दिखाई दे रहा है।
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की सरजमीं पर जीत के साथ भारत ने विश्व क्रिकेट में तहलका मचा दिया है। विराट कोहली की अगुवाई में भारत ने ऑस्ट्रेलिया में पहले टेस्ट सीरीज अपने नाम की। उसके बाद वनडे में भी धमाल मचाते हुए सीरीज पर 2-1 से कब्जा जमाया। इसके बाद टीम न्यूजीलैंड दौरे पर गई जहां भारतीय खिलाड़ियों ने सीरीज में 4-1 से कीवी टीम को रौंद दिया। जाहिर है इस तरह का प्रदर्शन टीम के विदेशी दौरे में ताकत का प्रमाण देता है। यह दर्शाता है कि इस टीम के पास घर के साथ विदेश में भी जीतने की काबिलियत है। लेकिन क्या इस जीत के भारत को कुछ ऐसा मिला है, जिसकी वजह से टीम इंडिया लंबे समय तक संतुलित हो सके। क्या इस दौरे से टीम इंडिया ने कुछ ऐसा हल खोज निकाला है, जिसका टीम मैनेजमेंट के साथ क्रिकेट प्रेमियों को भी लंबे समय से इंतजार था। सवाल कई सारे हैं लेकिन क्या इस दौरे से कप्तान कोहली के दिल में सुकून आया है। अगर बात करें इन सभी सवालों के जवाब की तो इसका हल वनडे क्रिकेट में भारत के लिए चौथे स्थान पर खेलने वाले खिलाड़ी की बहस को लेकर खत्म होता दिखाई दे रहा है। ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड दौरे में अपने बल्ले से दमदार प्रदर्शन करने वाले रायडू को लेकर अब नंबर 4 पर खेलने की बहस खत्म हो जानी चाहिए। क्योंकि पिछले कुछ समय में अपने ठोस प्रदर्शन से रायडू ने जता दिया है कि वर्ल्ड कप में चौथे नंबर पर उनसे ज्यादा अच्छे बल्लेबाज का विकल्प टीम इंडिया के पास नहीं हो सकता है।
हैमिलटन के मैदान में जब टीम इंडिया चौथे वनडे मैच में धराशायी हुई थी। उस वक्त शायद भारतीय क्रिकेट प्रेमी सबसे ज्यादा अंबाति रायडू को कोस रहे होंगे। वहीं ड्रेसिंग रूप में बैठे अंबाति रायडू भी खुद सोच रहे होंगे कि क्या उन्हें वह शॉट खेलना चाहिए था। लेकिन एक बड़ा बल्लेबाज वही होता है जो हालातों से सीखकर आने वाले मैचों में अपने खेल में सुधार करे। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के पांचवें और आखिरी वनडे मैच में कुछ ऐसा ही हुआ। टीम का स्कोर 18 रन पर 4 विकेट था और लग रहा था कि पिछले मैच वाली कहानी फिर से दोहराई जाएगी। लेकिन उस वक्त रायडू तो कुछ अलग ही ठानकर आए थे। रायडू की टीम में चौथे स्थान को लेकर जितनी भी बहस चल रही थी उसे खत्म कर दिया। रायडू ने भारत को मुश्किल परिस्थितियों से निकाला और टीम को सम्मानजक स्कोर तक पहुंचाया। रायडू ने मैच में 113 गेंदों का सामना करते हुए 8 चौके और 4 छक्के की मदद से 90 रन बनाए। जाहिर है रायडू के ये रन किसी बड़े शतक से भी ज्यादा मायने रखते हैं। क्योंकि उनकी पारी का ही कमाल था जो भारत ये मैच जीता पाया और शायद सीरीज 4-1 से अपने नाम कर सका। क्योंकि अगर उस दिन रायडू सूझबूझ से बल्लेबाजी नहीं करते तो हालात कुछ अलग हो सकते थे। ये दर्शाता है कि रायडू के पास विषम परिस्थितियों में भी टीम को जिताने की काबिलियत है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की वनडे सीरीज में रायडू सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। रायडू ने 5 मैचों में 63.33 की औसत से 190 रन बनाए थे। इससे पहले साल 2018 के एशिया कप में रायडू ने शानदार प्रदर्शन किया था। वहां पर उनके बल्ले से 43.75 की औसत से 175 रन निकले थे। वहीं विंडीज के खिलाफ मुंबई में शतक जड़कर भी उन्होंने चौथे नंबर पर खेलने की काबिलियत का प्रमाण पत्र दे दिया था। अगर इस दौरान भारत की तरफ से वनडे क्रिकेट में चौथे स्थान के लिए बल्लेबाज तलाशने की बात की जाए तो केएल राहुल, आजिंक्य रहाणे, मनीष पांडे, श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत और शुभमन गिल जैसे ना जाने कितने खिलाड़ियों को मौका दिया जा चुका है। लेकिन उनमें से ना तो किसी ने रन बनाए हैं और ना ही कभी नाजुक मौके पर टीम को जीत दिलाई है। लेकिन पिछले 6 महीनों में जिस तरह से अंबाति रायडू ने प्रदर्शन किया है, उससे ये जरूर पता चल गया है कि रायडू ही वर्ल्ड कप में भारत के लिए चौथे नंबर पर खेलने के सबसे बेहतरीन विकल्प हैं।
जाहिर है अंबाति रायडू ने जिस तरह से न्यूजीलैंड दौरे में प्रदर्शन किया है। उसकी वजह से इस बल्लेबाज के विश्व कप की टीम में जगह को लेकर बीसीसीआई और टीम मैनेजमेंट के मन में बिल्कुल भी शंका नहीं होनी चाहिए। क्योंकि रायडू ने अपनी बल्लेबाजी से दिखा दिया है कि वो मुश्किल परिस्थितियों में स्ट्रगल करने के बावजूद विकेट नहीं देने का दम रखते हैं और पैर जमने पर वो तेजी से रन भी बना सकते हैं। वहीं जब कप्तान कोहली भी रायडू की बल्लेबाजी से प्रभावित दिखते हैं तो उनका वर्ल्ड कप में चौथे नंबर पर खेलना तय ही है। साफ है वर्ल्ड कप अब ज्यादा दूर नहीं है और रायडू के अच्छा प्रदर्शन करने के साथ ही टीम इंडिया अब ट्रॉफी जीतने के लिए और ज्यादा मजबूत हो चुकी है।

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