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ध्रुवीकरण की राजनीति में छटपटाता लोकतंत्र – Rashtriya Pyara
राजनीति

ध्रुवीकरण की राजनीति में छटपटाता लोकतंत्र

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दुनिया के सबसे विशाल लोकतंत्र भारत में 16वीं लोकसभा के गठन के लिए आम चुनाव का प्रचार अजब—गजब मंजर दिखा रहा है। रामनवमी जुलूस के बहाने पश्चिम बंगाल में दंगा फैलाने, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उर्फ अजय सिंह बिष्ट द्वारा ‘अली और बजरंग बली’ कह के तथा बसपा अध्यक्ष मायावती द्वारा मुसलमानों को अपना वोट बेकार न करने की कह के चुनाव में ध्रुवीकरण की कोशिश, केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा सुल्तानपुर में अल्पसंख्यक मतदाताओं को धमकाने,कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा राफेल सौदे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भ्रष्टाचार में लपेटने की उतावली में ‘चौकीदार चोर है’ जुमला सुप्रीम कोर्ट पर चस्पां करने और सपा नेता आजम खां द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वी पर अमर्यादित टिप्पणी करने जैसी अनेक अपूर्व घटनाएं सामने आई हैं।

ऐसा नहीं है कि ध्रुवीकरण और अपने प्रतिद्वंद्वियों को घेरने अथवा उनके बारे में नकारात्मक बयानों का सिलसिला इस चुनाव में पहली बार शुरू हुआ है। इससे पहले के चुनावों में ‘एक शेरनी—सौ लंगूर’,’देखो इंदिरा का ये खेल—खा गई राशन पी गई तेल’ जैसे व्यक्तिगत आरोप जड़ने अथवा विरोधी का मजाक उड़ाने वाले अनेक नारे सामने आए हैं लेकिन ध्रुवीकरण का ऐसा नंगा नाच किसी चुनाव में नहीं हुआ।

ताज्जुब ये है कि इसमें बाजी सत्तारूढ़ बीजेपी के नेता मार रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उर्फ अजय सिंह बिष्ट अपनी पार्टी द्वारा ऐसे प्रचार की अगुआई कर रहे हैं जिससे विचलित होकर चुनाव आयोग को 16 अप्रैल से योगी की बोलती पूरे तीन दिन के लिए बंद करनी पड़ी है। यह प्रचार 18 अप्रैल को होने वाले दूसरे दौर के मतदान के लिए चल रहा है जिसकी उल्टी गिनती आज प्रचार का शोर थमने के साथ ही शुरू हो गई।

चुनाव आयोग ने हालांकि ये कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की फटकार खा कर की है फिर भी देश में लोकतंत्र की बिगड़ती चाल पर चिंतित मतदाताओं के लिए यह बेहद सुकूनदायक है। जनता के दरबार में सत्ता से हाथ धो बैठने की चिंता शायद बीजेपी नेताओं से अनर्गल और ध्रुवीकरण वाले बयान दिलवा रही है। इससे आजिज आकर सुप्रीम कोर्ट को लोकतंत्र की पतवार थामते हुए चुनाव आयोग को अपना फर्ज निभाने की हिदायत देनी पड़ी। उसीके बाद चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीन दिन, बसपा सुप्रीमो मायावती पर दो दिन, सपा नेता आजम खान पर तीन दिन और केंद्रीय मंत्री तथा बीजेपी नेता मेनका गांधी पर दो दिन भाषण देने से रोक लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल संबंधी पुनर्विचार याचिका की सुनवाई में अखबार में छपे दस्तावेजों पर विचार की सम्मति देने संबंधी अपने निर्णय पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी के संदर्भ में सीधे उन्हें नोटिस देकर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने श्री गांधी से पूछा है कि उन्होंने अपनी राय को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कही गई बात बताकर कैसे सार्वजनिक बयान दे दिया।

हिमाचल प्रदेश के बीजेपी अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने तो संयम खोने की जैसे सारी हद पार कर दीं। उन्होंने चुनाव सभा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के विरूद्ध सरेआम गाली—गलौज कर दी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होने तथा कांग्रेस द्वारा पुलिस एवं चुनाव आयोग में केस दर्ज कराने के बावजूद राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को उनकी बोलती बंद करने की सुध अब तक नहीं आई!

योगी आदित्यनाथ उर्फ अजयसिंह बिष्ट अपने भाषणों में भारत की निरपेक्ष सेना को ‘मोदीजी की सेना’ बता कर सेना का भी राजनीतिकरण करने से बाज नहीं आए। इससे पहले राजस्थान के विधानसभा चुनाव में योगी द्वारा हनुमान जी को दलित जाति का बता कर दलितों के वोट हथियाने की कोशिश की जा चुकी। योगी ने ही हाल में ध्रुवीकरण के लिए कहा,’अगर कांग्रेस, एसपी, बीएसपी को अली पर विश्वास है, तो हमें भी बजरंग बली पर विश्वास है।’इसी बयान पर चुनाव आयोग ने तीन दिन के लिए उनकी बोलती बंद की है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में कब्रिस्तान बनाए जाने पर श्मशान भी बनाए जाने तथा रमजान पर चौबीस घंटे बिजली देने पर दीवाली के दिन भी पूरी बिजली मिलनी चाहिए ना कहकर ध्रुवीकरण किया था। उन्हीं की मंत्री मेनका गांधी ने हाल में कहा- ‘जिस इलाके से जितना मत हासिल होगा, वहां उतना काम होगा।’ उन्होंने वोट के आधार पर इलाकों को ABCD श्रेणी में बांटने की बात कही थी। उससे पहले उन्होंने सुल्तानपुर की सभा में कहा, ‘अगर उन्हें मुसलमान वोट नहीं देंगे, तो अच्छा नहीं लगेगा। वो मुसलमानों के समर्थन के बिना भी चुनाव जीत सकती हैं।’इसी बयान पर चुनाव आयोग ने मेनका की दो दिन के लिए बोलती बंद की है।

बीजेपी की महाराष्ट्र में सहयोगी पार्टी शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मीरा रोड-भायंदर इलाके में चुनावी सभा में कहा,‘हम ऐसे लोग हैं,भाड़ में गया कानून,आचार संहिता भी हम देख लेंगे। जो बात हमारे मन में है,वो अगर हम मन से बाहर नहीं निकालें तो घुटन सी होती है।’ बीजेपी के ही नेता जयकरण गुप्ता ने प्रियंका गांधी वाड्रा का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा,‘अरे स्कर्ट वाली बाई साड़ी पहनकर मंदिर में शीश नवाने लगी। गंगाजल से परहेज करने वाले लोग,गंगाजल का आचमन करने लगे।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सेना और पुलवामा कांड के नाम पर वोट मांगे जाने पर चुनाव आयोग एतराज कर चुका है। बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह पश्चिम बंगाल और गोवा में सिखों,बौद्धों और हिंदुओं के अलावा सभी कथित घुसपैठियों को असम की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी के जरिए भारत की सीमा से बाहर खदेड़ देने जैसा घोर ध्रुवीकरण करने वाला बयान दे रहे हैं। इस बयान की भी हालांकि कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की है मगर राज्यों चुनाव अधिकारी तो जैसे कान में तेल डाले बैठे हैं।

बीजेपी आला कमान यानी मोदी—शाह सहित तमाम नेता, कार्यकर्ता और ट्रोलर्स ब्रिगेड जैसे ध्रुवीकरण वाले और भ्रामक प्रचार में जुटी है उसे देख—सुन कर 1977 का आम चुनाव याद आ रहा है। आपातकाल के बाद हुए मार्च 1977 के ऐतिहासिक चुनाव में सारे मीडिया पर आज मोदी—शाह की तरह इंदिरा—संजय का कब्जा था। मात्र इंडियन एक्सप्रेस ही ऐसा अखबार था जो कांग्रेस की ऐतिहासिक हार का आईना तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दिखा रहा था। अफसोस कि लोकतंत्र के चौथे पाये की आजादी के सबसे प्रखर योद्धा रामनाथ गोयनका का कालजयी अखबार इंडियन एक्सप्रेस भी पूंछ कटा कर बाकी मीडिया की तरह लोकतंत्र का चीरहरण होते आज टुकुर—टुकुर देख रहा है।

ग़नीमत यह है कि ‘द हिंदु’ और ‘द टेलीग्राफ’ अखबार आज भी ‘एंटी एस्टैब्लिशमेंट प्रेस’ यानी मीडिया की निरपेक्ष भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। इसी तरह एनडीटीवी इंडिया भी लोकतंत्र के पुनीत चुनावी यज्ञ में मीडिया की ओर से कमोबेश सटीक आहूतियां डाल रहा है। अब देखना यही है कि ध्रुवीकरण के तमाम प्रयासों के बावजूद क्या 2019 का आम चुनाव 1977 के चुनाव की तरह सत्तारूढ़ दल और उसके कथित सर्वव्यापी नेता को इंदिरा गांधी और इंका की तरह धूल चटाने वाला तथा लोकतंत्र का रक्षक साबित होगा?

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