उत्तर प्रदेश

फर्जी बैनामों की जांच करने रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे एडीएम

मेरठ। फर्जी बैनामों की जांच करने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) मंगलवार को मवाना के रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे और बाबा बिरसा सिंह के फार्म के दौ बैनामों का रिकार्ड देखा। दोनों बैनामों की रिपोर्ट तैयार कर वे अपने साथ ले गये, वहीं इन दोनों बैनामों से सम्बंधित रिकार्ड किठौर थाना पुलिस ने भी लिया है। एडीएम ने इन दोनों बैनामों की जांच तहसीलदार को सौंप दी है। उधर उक्त भूमि पर गेहूं की फसल पकी खड़ी है, जिसे काटने को लेकर भगवानपुर निवासी टहल सिंह ने शासन व डीएम से शिकायत की। इस मामले की जांच प्रशासन व पुलिस दोनों स्तर से की जा रही है।
तहसील क्षेत्र के गांव अकबरपुर गढ़ी निवासी जहांगीर पुत्र मंशा सिंह ने वर्ष 2003 में गांव किशोरपुर स्थित 1.329 हेक्टेयर भूमि का मवाना रजिस्ट्री कार्यालय में बैनामा किया। बिजनौर जिले की तहसील चांदपुर व हॉल निवासी सैफपुर फिरोजपुर निवासी जंगीर सिंह पुत्र मुंश उर्फ रूड़ा सिंह और बलबीर पुत्र प्रेमसिंह शिवसदन संयुक्त सहकारी कृषि समिति के सदस्य है। जंगीर सिंह पुत्र मुंश उर्फ रूड़ा सिंह ने 18 अक्टूबर 2017 में गांव भगवानपुर खादर क्षेत्र की 13.0130 हेक्टेयर और 0.8980 हेक्टेयर भूमि 15 लाख रुपये में सरधना तहसील के गांव धंजू निवासी राजकुमार को बेची। जंगीर सिंह ने बैनामा करते समय आधार, पैन कार्ड और बैंक पास बुक की फोटो प्रति सलंग्न की है। आरोप है कि बलबीर के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को फर्जी तौर पर खड़ा कर जमीन बेची गई।
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) रामचन्द ने मंगलवार दोपहर दो बजे रजिस्ट्री कार्यालय में इन दोनों बैनामों का रिकार्ड निकलवाकर जांच की। प्रथम दृष्टया जांच में पाया गया कि इन दोनों गांवों की जमीन बेचने वाला एक ही व्यक्ति है। इनमें भगवानपुर खादर क्षेत्र की भूमि बाबा बिरसा सिंह के फार्म में आती है। दोनों बैनामे करने के दौरान अलग-अलग गांव का निवासी होने का आधार कार्ड लगाया है। इसी कारण बैनामों के फर्जी होने की संशय दिखाई पड़ रही है। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ने इन दोनों बैनामों की जांच तहसीलदार अशोक गुप्ता को सौंपी है। दूसरी ओर मंगलवार को किठौर थाने के उपनिरीक्षक सुनील कुमार सिंह ने रजिस्ट्री कार्यालय में शपथ पत्र देकर उक्त दोनों बैनामों की फोटो प्रति ली है। इन दोनों बैनामों के फर्जी होने की शिकायत पर किठौर पुलिस भी जांच कर रही है।
तहसील की अनुमति के बाद होते हैं बैनामे
बाबा बिरसा सिंह के शिवसदन में हजारों एकड़ कृषि भूमि है। इस फार्म की जमीन का बैनामा कराने से पहले तहसील कार्यालय की स्वीकृति जरूरी है। तहसील कार्यालय से स्वीकृति के बाद ही बाबा बिरसा सिंह के फार्म की भूमि का बैनामा रजिस्ट्री कार्यालय में किया जाता है। यह आदेश करीब 2011 में तत्कालीन एसडीएम ने जारी किये थे। भगवानपुर की भूमि का बैनामा वर्ष 2017 में किया गया है, जिसमें तहसील की स्वीकृति लगी हुई है।
एडीएम पहुंचे पसवाड़ा
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) रामचन्द्र व तहसीलदार अशोक गुप्ता मंगलवार को किला परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र के गांव पसवाड़ा पहुंचे। पसवाड़ा गांव में खड़ंजा विवाद चल रहा है। विवाद के चलते खड़जा निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है। ग्रामीण सुखबीर सिंह ने खड़ंजा विवाद की शिकायत एडीएम से की थी। इसी कारण मंगलवार को एडीएम गांव पसवाड़ा पहुंचे और मौके पर जांच की। ग्रामीण उसे निजी जमीन बता रहा है, जबकि प्रधान पक्ष उसे ग्राम समाज की भूमि होने के नाते खड़जा निर्माण करा रहा है। उन्होंने इस मामले की जांच तहसीलदार मवाना को सौंपी है।

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