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बॉक्सर मनोज ने फिर साई पर हमला बोला, वित्तीय सहायता का ब्यौरा दिया

नई दिल्ली। मुक्केबाज मनोज कुमार ने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) पर अपने करियर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया, लेकिन साई का कहना है कि राष्ट्रमंडल खेलों के तीन बार के इस पदकधारी को सहायता मुहैया करायी जाती रही है। खेल मंत्रालय राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को लिखे पत्र में मनोज के बड़े भाई और कोच राजेश कुमार राजौंद ने कहा कि साई के अधिकारी सच्चाई नहीं बता रहे।
उन्होंने दोहराया कि अधिकारी मनोज की ग्रोइन चोट के उपचार के लिए साढ़े पांच लाख रुपए की राशि देने में रोड़ा अटका रहे हैं। इस मुक्केबाज को यह चोट पिछले साल जकार्ता एशियाई खेलों के दौरान लगी थी। राजेश ने इस चोट का जिक्र पत्र में करते हुए लिखा, ”चेकअप के बाद एमआरआई रिपोर्ट में फ्रेक्चर था। रिपोर्ट और इसमें होने वाले खर्चे को संबंधित अधिकारियों के पास भेजा गया।”
उन्होंने कहा, ”अस्पताल ने उपचार के लिए जितनी अनुमानित लागत बतायी थी वो 5,30,400 रुपए थी। हालांकि सभी चिकित्सयीय रिपोर्ट भेजने के बाद भी मुझे संबंधित अधिकारियों से कोई पुख्ता जवाब नहीं मिला।
लेकिन साई ने जारी बयान में इस बात से इनकार किया कि मनोज को मझधार में छोड़ दिया और जब वह टॉप्स योजना का हिस्सा थे और उन्हें मुहैया करायी गयी वित्तीय सहायता की जानकारी दी। साई के अनुसार, ”मनोज कुमार 2016 से 2018 एशियाई खेलों तक टॉप्स योजना का हिस्सा थे। इस दौरान उन्हें टॉप्स योजना के अंतर्गत 24.8 लाख रुपए मिले। इसमें सितंबर 2018 में कोकिलाबेन अस्पताल में कूल्हे की चोट के उपचार के लिए उन्हें दिये गये 60,000 रुपए भी शामिल हैं। यह मदद 2015 से 2018 तक राष्ट्रीय शिविर में सरकारी सहायता से मिली राशि से अलग थी।”
साई ने कहा कि मनोज ने जो साढ़े पांच लाख रुपए की मांग की थी, वह आधिकारिक रूप से साई को संबोधित नहीं थी। उन्होंने कहा, ”साई को मनोज कुमार से उपचार के लिए 5,30,400 रुपए की वित्तीय सहायता मांगने संबंधित कोई प्रस्ताव नहीं मिला था। यह प्रस्ताव नवंबर 2018 में भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) को भेजा गया था, साई को केवल सूचना के लिए चिन्हित किया गया था कि बीएफआई को यह भेज दिया गया है।”
साई ने कहा, ”एशियाई खेलों के बाद उनकी चोटिल होने की रिपोर्ट थी तो बीएफआई के हाई परफोरमेंस निदेशक ने उनके प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा की और इसे साई को सौंपा। मनोज कुमार को इसलिए पटियाला के एनआईएस में लगे राष्ट्रीय कोचिंग शिविर में शामिल नहीं किया गया।”
साई ने कहा कि मनोज का टॉप्स योजना में शामिल होना, उनके आगामी कुछ महीनों में होने वाले प्रदर्शन पर निर्भर करता है। इसके अनुसार, ”टॉप्स योजना में उनके शामिल किये जाने के लिए उनकी समीक्षा हो रही है जो उनके प्रदर्शन की विस्तृत आकलन पर और तोक्यो 2020 में उनके पोडियम स्थान पर रहने की संभावना पर निर्भर करेगी।”
मनोज ने हालांकि कहा कि वह 69 किग्रा वर्ग में भारत के सर्वश्रेष्ठ दावेदार हैं जिसमें उन्होंने पिछले साल गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने ‘भाषा से कहा, ”जब मेरे जैसे खिलाड़ी के साथ ऐसा हो रहा है, जिसके पास मुक्केबाजी कोच के तौर पर उसका भाई मौजूद है जो हर जगह कागजी कार्रवाई में मदद करता है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जिनके पास बताने के लिए कोई मौजूद नहीं है तो वे किस तरह से अपनी बात रख पाते होंगे।” 32 साल का यह मुक्केबाज कई बार का एशियाई पदकधारी है और 2017 का राष्ट्रीय चैम्पियन है।

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