राजनीति

मोदी फैक्टर को कमजोर करने कमलनाथ ने तेज की कसावट

छिंदवाड़ा से फुर्सत होने के बाद मुख्यमंत्री प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने प्रदेश में मोदी फैक्टर को कमजोर करने के लिए जमीनी स्तर पर कसावट तेज कर दिए कांग्रेस नेताओं को जिम्मेवारी दी जा रही है कि वे अपने अपने क्षेत्रों में पार्टी को चुनाव जिता ए तब ही उनकी पार्टी में पूछ परख बढ़ेगी इसके लिए उन्होंने संगठन स्तर पर सभी नेताओं पर नजर रखने के लिए निर्देश दिए कौन पार्टी के लिए कितना काम कर रहा है और फिर कौन भोपाल काम कराने के लिए ज्यादा आता है।

दरअसल 15 सालों के बाद प्रदेश में सत्ता वापसी करने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश में लोकसभा की अधिकतम सीटें जीतने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया था और इसी के तहत उन्होंने चार्ज लेने के बाद 1 घंटे के अंदर किसानों की कर्ज माफी की फाइल पर हस्ताक्षर करके यह संदेश देने की कोशिश की थी कि पार्टी जो वादा करेगी उसे पूरा करेगी लेकिन आचार संहिता लगने के कारण और सरकार के पास धन की कमी के कारण भी किसानों की कर्ज इतनी संख्या माफ नहीं हो पाए जितनी की प्रदेश में माहौल बनाने के लिए जरूरी है।

दूसरी तरफ विपक्षी दल भाजपा लगातार कर्ज माफी के मुद्दे पर कांग्रेस को दोष देती आ रही है कि कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में आने के लिए किसान से 200000 कर्जमाफी करने का झूठा वादा किया था और अब से वह पूरा नहीं कर पा रही है लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ कमलनाथ एक के बाद एक ऐसे निर्णय लेते रहे जिससे ये संदेश बने काम करना चाहते है और लोकसभा चुनाव में प्रदेश की अधिकतम सीटें जीत पाएं इसके लिए उन्होंने जहां अधिकतम बेहतर प्रत्याशी उतारे जातीय समीकरणों का ध्यान रखा लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा कांग्रेस का मुकाबला मोदी फैक्टर से होने लगा यहां तक की भाजपा के प्रत्याशी ना अपना नाम ले रहे हैं।

और ना पार्टी का वह केवल मोदी मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के नाम पर वोट मांग रहे यही कारण है की 6 लोकसभा सीटों के चुनाव 29 अप्रैल को संपन्न होने के बाद जिसमें छिंदवाड़ा लोकसभा और विधानसभा का चुनाव भी शामिल था मुख्यमंत्री कमलनाथ छिंदवाड़ा विधानसभा का और उनके पुत्र नकुल नाथ छिंदवाड़ा लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे यहां से फुर्सत होने के बाद अब मुख्यमंत्री कमलनाथ प्रदेश की शेष बचे 23 सीटों पर मोदी फैक्टर को भेदने की योजना पर काम करना तेज कर दिया है।

और उन्होंने बूथ स्तर पर कांग्रेसियों को सक्रिय किया है कि वे स्थानीय मुद्दों को उठाकर बूथ जीते इसके लिए उन्होंने नेताओं के बीच आपस में समन्वय बनाकर कसावट तेज कर दी है और स्वयं तो सभाएं ले ही रहे हैं पार्टी के नेताओं की सभाएं भी ऐसे स्थानों पर की जा रही है जिससे आसपास की सीटों पर फायदा मिल सके खासकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा ऐसे स्थानों पर रखी जा रही है जिससे आसपास की लोकसभा सीटों पर प्रभाव पढ़ सकें और जहां सभा हो वैसे तो कम से कम जीती जा सके और राहुल गांधी की सभाओं के माध्यम से मोदी फैक्टर को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

कुल मिलाकर मुख्यमंत्री कमलनाथ की पूरी योजना प्रदेश में शेष बची सीटों पर मोदी फैक्टर को कमजोर करने की है जिसके लिए चौतरफा कसावट कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नीचे से कार्यकर्ता से लेकर राष्ट्रीय नेता तक केवल और केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांग रहे हैं रहे हैं साथ में प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप लगा रहे दोनों ही दल अपनी अपनी रणनीति पर चुनाव प्रचार को आगे बढ़ा रहे लेकिन मतदाता के मन मस्तिष्क में चुनाव के दिन कौन सी बात उभरकर आती है।

इसी पर जीत हार तय होगी क्योंकि लगभग सभी सीटों पर कड़े मुकाबले हो रहे हैं भाजपा अपने गढ़ में भी जहां जीत के लिए निश्चिंत नहीं है वहीं कांग्रेश भाजपा से सीटी जीने के लिए बेताब है लेकिन मोदी फैक्टर के चलते वह जीत के प्रति निश्चिंत नहीं है यही कारण है कि अब कमलनाथ की पूरी रणनीति मोदी फैक्टर को कमजोर करने की है।

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