दिल्ली

रैपिड रेल को लेकर अड़चन दूर, पैसे देने के लिए दिल्ली सरकार राजी

नई दिल्ली। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) को लेकर सारी अड़चन दूर हो गई है। दिल्ली सरकार अपने हिस्से के पैसे देने के लिए तैयार है। इसे लेकर परिवहन विभाग ने कैबिनेट नोट तैयार किया है, जिसे वित्त विभाग से हरी झंडी मिल गई है। अब बस कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही दिल्ली सरकार पहली किश्त जारी कर देगी।
आरआरटीएस को वर्ष 2025 तक पूरा करना है। इसके शुरू होने से दिल्ली-मेरठ का सफर महज 55 मिनट में पूरा हो सकेगा। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट नोटमें आरआरटीएस के लिए दिल्ली सरकार की कुल हिस्सेदारी 3600 करोड़ रुपये बताई गई है। यह राशि सरकार छह साल में छह किश्तों में देगी। इससे प्रत्येक वर्ष खजाने पर 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
इसलिए नाराज थी दिल्ली सरकार : आरआरटीएस के तहत सराय काले खां पर बनाए जाने वाले स्टेशन के डिजाइन में केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को बताए बिना ही बदलाव को मंजूरी दे दी। इस कारण सराय काले खां में पीपीपी मॉडल के तहत प्रॉपर्टी डेवलपमेंट करके दिल्ली सरकार को मिलने वाले राजस्व का उसे नुकसान हो गया। नाराज दिल्ली सरकार ने बीते साल पैसे की कमी बताकर अपना हिस्सा देने से मना कर दिया था। मगर, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने पर्यावरण कर से 265 करोड़ रुपये का भुगतान नेशनल रीजन रैपिड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (एसीआरटीसी) को पहले ही कर दिया है। अब कैबिनेट नोट को मंजूरी मिलते ही बचे पैसे जारी किए जाएंगे।
समिति गठित : दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के निर्माण में और तेजी लाने के लिए दिल्ली सरकार ने
गाजियाबाद में शुरू हो गया है काम : दिल्ली-मेरठ के बीच रैपिड रेल का काम गाजियाबाद में शुरू हो गया है। पहले चरण में गुलधर के पास एनसीआरटीसी ने काम शुरू किया है।

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