धर्म-संसार

संतों और विद्वानों की सभा में बताया गया कुरुक्षेत्र कुंभ का महत्व

शास्त्रों में उल्लिखित कुरुक्षेत्र कुंभ महोत्सव के दौरान शास्त्र मंथन का आयोजन किया गया है। कुरुक्षेत्र विवि के सीनेट हॉल में राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन सभा ने सर्वसम्मति से कुरुक्षेत्र में कुंभ होने की शुभ सम्मति दी। इस सभा में द्वादश कुंभ पुनर्जागरण के प्रेरणा पुरुष करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज, ख्याति प्राप्त संत भागवत रत्न और धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज के शिष्य स्वामी देवी दयाल पांडे, अयोध्या से पहुंचे चारों वेदों के भाष्यकार डॉ देवी सहाय पांडे, काशी विश्वविद्यालय के धर्मागम विभाग के वरिष्ठ आचार्य श्री कमलेश झा जी, कुरुक्षेत विवि में दर्शन विभाग के डॉ महेन्द्र हंस जी, बरौनी संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ घनश्याम झा जी, कुरुक्षेत्र संस्कृत विभाग के डॉ अरुणेश्वर झा जी संस्कृत विदुषी डॉ शिवानी जी उपस्थित थे।
कुरुक्षेत्र विवि के सीनेट हाल में चल रही इस सभा में तीर्थ पुरोहित सभा कुरुक्षेत्र के प्रतिनिधि आचार्य वृजमोहन भार्गव अपने प्रश्न को लेकर आए। उन्होंने कहा कि पहले कभी कुरुक्षेत्र कुंभ का उल्लेख नहीं सुना। उनके प्रश्न का समाधान करने बरौनी संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. घनश्याम झा जी आएं। उन्होंने धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज उल्लिखित कुंभ पर्व निर्णय पुस्तक के श्लोक-
‘देवानां द्वादशाहोभिर्मर्त्यैद्वादशवत्सरै
जायंते कुंभ पर्वाणी तथा द्वादशसंख्यया’
अर्थात देवताओं के बारह दिनों अथवा मनुष्यों के बारह वर्षों में बारह कुंभ होते हैं का वर्णन किया। उसके बाद उन्होंने रुद्रयामल तंत्र के अमृतीकरणप्रयोग अध्याय में श्लोक 122-128 में बारह स्थानों पर कुंभ का उल्लेख किया। उनके समाधान प्रस्तुत करने के बाद अयोध्या से आए डॉ. देवी सहाय पांडे ने कुंभ की वैज्ञानिक व्याख्या की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुरुक्षेत्र में ज्योतिषीय विधि से लगे कुंभ में प्रकृति की शक्तियां इक्ट्ठी होती हैं। डॉ. देवी सहाय पांडे जी की व्याख्या के बाद आचार्य वृजमोहन भार्गव ने कहा कि वो इस व्याख्या से संतुष्ट हैं। उन्होंने माना कि उन्हें अभी तक कुंभ के मूल अर्थ का पता नहीं था।
बने यह योग तो खुद को अकेला समझता है आदमी
इसके बाद संत भागवत रत्न और धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज के शिष्य स्वामी देवी दयाल पांडे ने कहा कि विद्वत सभा जो निर्णय लेती है वह प्रबुद्ध समाज में मान्य होता है। इस घोषणा के बाद पूरी सभा ने देश के अलग-अलग हिस्सों से आए संतों, विद्वानों और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में ऊं के उच्चारण के साथ कुरुक्षेत्र में कुंभ की संस्तुति की।
कुरुक्षेत्र विवि के सीनेट हाल में ‘भारत का गौरव द्वादश कुंभ और धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र’ विषय को लेकर तीन दिनों की संगोष्ठी का आयोजन किया गया है जिसमें देश भर के विद्वान अपने-अपने विचार रख रहे हैं। इस संगोष्ठी में इस विषय पर जो भी अपना विचार रखना चाहते हैं वो आमंत्रित हैं।

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