सेहत

हाइपरटेंशन, ब्रेन स्ट्रोक और डायबिटीज से बचाएंगे रसोई मसाले

कानपुर। हाइपरटेंशन, ब्रेन स्ट्रोक, कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर, डायबिटीज और बुखार जैसी बीमारियों से अब रसोई मसाले बचाएंगे। बस इसमें अन्य औषधीय पौधों (मेडिसिनल प्लांट) का समावेश किया जाएगा, जो आपकी सेहत को बिगड़ने नहीं देंगे। उत्पादन और प्रसंस्कण में बदलाव की तैयारी कर ली गई है। चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी (सीएसए) विवि के वैज्ञानिक इस मुहिम को दुनिया में फैलाएंगे।
संस्थान के वैज्ञानिक ऐसे मेडिकेटेड मसालों को तैयार करने के लिए विभिन्न देशों को एकजुट करने की मुहिम में हैं। उनका मानना है कि इस पहल से न सिर्फ लोग फिट रहेंगे, बल्कि मसाला उत्पादक देशों की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा। विवि के संयुक्त निदेशक शोध डॉ. डीपी सिंह का कहना है कि भारत में पाए जाने वाले 95 फीसदी मसालों में औषधीय गुण मिल रहे हैं। अगर उसमें अन्य औषधीय पौधों का मिश्रण कर दिया जाए तो प्राकृतिक रूप से होने वाली बीमारियों से लोगों बचाया जा सकता है। औषधीय गुणों वाले मसालों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
दक्षिण एशियाई देशों के वैज्ञानिक, उद्यमी शामिल होंगे
सीएसए विवि में 21 नवंबर से तीन दिवसीय इंटरनेशनल कांफ्रेंस स्पाइसकॉन-2019 का आयोजन होगा। इसमें दक्षिण एशिया के साथ उन देशों के वैज्ञानिक और बड़े उद्यमी शामिल हो रहे हैं जहां मसालों की खेती होती है। खास बात है कि इन देशों की अर्थव्यवस्था में मसाला उद्योग की अहम भूमिका है। 25 देशों के प्रतिनिधियों ने शामिल होने पर रजामंदी दे दी है। सेमिनार में मसाला एक्सपो भी लगेगा, जिसमें इस उद्योग में इस्तेमाल हो रही उन्नत तकनीक का प्रदर्शन होगा। इसी के सहारे उद्यमी तकनीक साझा करेंगे।
प्रो. सुशील सोलोमन (कुलपति, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि) ने कहा- कानपुर मसाला उद्योग का गढ़ है। शहर और आसपास मसालों की बड़ी पैदावार होती है। बुंदेलखंड क्षेत्र में इसके लिए बड़ी संभावना है। यह क्षेत्र काफी सुस्त पड़ा है जबकि दुनिया भर में मसालों की डिमांड बढ़ी है। ऐसे में किसानों और उद्योगों के लिए संभावनाएं अधिक हैं। इस क्षेत्र में उन्नत तकनीक लागू करके मसालों की खेती और उद्योगों को तेजी दी जा सकती है।

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