Home विशेष

विशेष

विशेष
शची अपने पति पल्लव के अधीनस्थ कर्मचारियों से रिश्वत ले कर उन का प्रमोशन, ट्रांसफर आदि कार्य करने के लिए पल्लव को बाध्य करती थी, लेकिन एक दिन वक्त ने उस के साथ ऐसा क्रूर मजाक किया कि उस के पास अपनी गलती पर सिर्फ पछताने के और कुछ न बचा. ‘‘मिश्राजी, अब तो आप […]Continue Reading
विशेष
मैं देखती रही बाट उस पल की, कि तुम आओगे और दो पल ही सही मेरे साथ बिताओगे. कुछ मेरी सुनोगे कुछ अपनी सुनाओगे, मेरे बिना कहे ही भांप लोगे, मेरी आंखों के गिर्द स्याह घेरों को, और मेरे बालों पर उभर आई श्वेत रेखाओं को. मैं देखती रही बाट उस पल की कि तुम […]Continue Reading
विशेष
जिंदगी के इस गणित में दो और दो ना चार हैं, अब तक समझ पाया न मैं ये प्यार है, व्यापार है. अश्क आंखों में नजर आते ही ना समझो है गम. दिल्लगी से भी बिगड़ जाए, रहे ना अब वो हम. ठूंठ हो कर रह चुका गम आए इतनी बार हैं. अब तक समझ […]Continue Reading
विशेष
हमेशा जिंदादिल और खुशमिजाज रमा को अंदर आ कर चुपचाप बैठे देख चित्रा से रहा नहीं गया, पूछ बैठी, ‘‘क्या बात है, रमा…?’’ ‘‘अभिनव की वजह से परेशान हूं.’’ ‘‘क्या हुआ है अभिनव को?’’ ‘‘वह डिपे्रशन का शिकार होता जा रहा है.’’ ‘‘पर क्यों और कैसे?’’ ‘‘उसे किसी ने बता दिया है कि अगले 2 […]Continue Reading
विशेष
हाय, ये लाजभरी कजरारी पलकें मदअलसाई निंदियारी सपनीली आंखें गोरे चिकने शानों पे बिखरीबिखरी घटा घनघोर महकी स्याह रेशमी जुल्फें. हाय, ये लपलपाती नाजुक पतली कटारी कमर गजगामिनी इठलाती मतवाली हंसिनी चाल नखशिख गदराया मखमली ‘पूनम’ सा यौवन गुलाब की लचकती मस्ताई शोख कुंआरी डाल. न यों रूठी रहो बौराए वसंती फालगुन में शराबी रस […]Continue Reading
विशेष
शादी में बस चंद दिन ही रह गए थे. पिछली बार जब पूजा अपने मंगेतर राहुल से मिली थी तो दोनों में यह तय हुआ था कि शादी के करीब होने से उन को अब मुलाकातों का सिलसिला रोक देना चाहिए. यह दुनियादारी के लिहाज से ठीक भी था. इस आपसी फैसले को अभी कुछ […]Continue Reading
विशेष
छोरी छरहरी की कोमल कलाई ने नींद चुराई है. काली कजरारी की चंचल चमकाई ने नींद चुराई है. गोरी के गालों पर अंकुरी अरुणाई ने नींद चुराई है. घुमड़ी घटाओं की नागिन निराली ने नींद चुराई है. गजरे के गुच्छे की मादक महकाई ने नींद चुराई है. प्रीत की प्याली की रसमय रचाई ने नींद […]Continue Reading
विशेष
काफी समय के बाद विजय से मिलना हुआ. मौसी की बेटी की शादी थी. मामा की एक बेटी थी मिन्नी और बेटा विजय. मिन्नी बचपन से ही नकचढ़ी थी और विजय मेधावी और शालीन. मिन्नी काफी सभ्य, समझदार और विजय भी एक पूर्ण अस्तित्व. समूल परिपक्वता लिए हुए नजरों के सामने आए तो समझ ही […]Continue Reading
विशेष
वरिष्ठ लेखक संतोष उत्सुक की ओर से रचित बाल कविता ‘अब सर्दी आयेगी’ मौसम में परिवर्तन से पड़ने वाले प्रभावों और उसके चलते बदलती जीवनशैली की ओर इंगित करती है। अब सर्दी आएगी बरसात चली गई है अब सर्दी आ जाएगी धीरे धीरे रंगीन स्वैटर पहने जाएंगे टी शर्ट नेकर छिप जाएंगे शाम सवेरे ठिठुरन […]Continue Reading
विशेष
घर में घुसते ही चंद्रिका के बिगड़ेबिगड़े से तेवर देख रवि भांपने लगा था कि आज कुछ हुआ है, वरना रोज मुसकरा कर स्वागत करने वाली चंद्रिका का चेहरा यों उतरा हुआ न होता. ‘‘लो, दीदी का पत्र आया है,’’ चंद्रिका के बढ़े हुए हाथों पर सरसरी सी नजर डाल रवि बोला, ‘‘रख दो, जरा […]Continue Reading